लॉकडाउन सिर्फ समय देता है- टेस्ट बढ़ाने, अस्पताल तैयार करने, वेंटिलेटर प्राप्त करने के लिए : राहुल गाँधी

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आवामी कवरेज न्यूज़ नई दिल्ली

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज प्रेस वार्ता कर कहा यह स्पष्ट है कि हम बहुत गंभीर स्थिति में हैं और मुझे लगता है कि यदि हम इस समस्या को हल करना चाहते हैं और इस वायरस को हराना चाहते हैं, तो सभी राजनीतिक दलों और भारत के लोगों को एक साथ काम करना होगा वायरस के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार टेस्ट है। टेस्ट करने से ये जान सकते हैं कि वायरस कहाँ घूम रहा है और उसको अलग करके लड़ा जा सकता है। हमारी टेस्ट दर 199 / मिलियन है और जो टेस्ट किए जा चुके हैं, उनका औसत 350 टेस्ट / जिले का है कोविड वायरस से लड़ने के लिए हमारी मुख्य ताकत राज्य और जिला स्तर पर है। वायनाड में सफलता जिला स्तर की मशीनरी के कारण मिली है। इसलिए मेरा सुझाव है कि कोविड के खिलाफ लड़ाई टॉप-डाउन न होकर बॉटम-अप हो। प्रधानमंत्री राज्यों को सशक्त बनाए पिछले कुछ महीनों से, मैं भारत में, विदेशों में, सरकार के बाहर, सरकार में बड़ी संख्या में विशेषज्ञों से बात कर रहा हूं, जिन्हें इस बात की बहुत अच्छी समझ है कि क्या चल रहा है, इसलिए मैं जो भी कहूंगा वह इन वार्तालापों पर आधारित होगा मैं आज कुछ बातें कहने जा रहा हूँ और उन्हें आलोचना की भावना से नहीं, बल्कि रचनात्मक समर्थन और सलाह की भावना से समझा जाना चाहिए ।

• लॉकडाउन सिर्फ समय देता है- टेस्ट बढ़ाने, अस्पताल तैयार करने, वेंटिलेटर प्राप्त करने के लिए। एक गलत धारणा है, जिसे मैं साफ करना चाहता हूं। किसी भी तरह से लॉकडाउन वायरस को नहीं हराता है, यह कुछ समय के लिए वायरस को रोकता है ये समझना होगा कि लॉकडाउन एक पॉज बटन की तरह है, यह किसी भी तरह से कोरोनावायरस का समाधान नहीं है। जब हम लॉकडाउन से बाहर आते हैं, तो वायरस अपना काम फिर से शुरू कर देगा। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि हमारे पास लॉकडाउन से बाहर आने की रणनीति हो MP-LAD इस स्थिति में मूल मुद्दा नहीं है, बल्कि साथ मिलकर लड़ना महत्वपूर्ण है। हमारे संसाधनों के सटीक इस्तेमाल पर हमरा ध्यान होना चाहिए सरकार को एक सलाह है- टेस्ट को आक्रामक रूप बढ़ाएं, अधिकतम टेस्ट करें और इसे रणनीतिक रूप से उपयोग करें। अपनी लड़ाई में राज्यों की सहायता के लिए टेस्ट का उपयोग करें, न केवल मरीजों को ट्रैक करने के लिए, बल्कि वायरस का पता लगाने के लिए लॉकडाउन के बाद की रणनीति पर ध्यान देना जरूरी है। टेस्टिंग, मेडिकल की रणनीति क्या होगी? PHC, हॉस्पिटल को कैसे तैयार करोगे? क्योंकि, लॉकडाउन के बाद बीमारी बढ़ेगी। एक्शन में देरी नहीं होनी चाहिए ।

न्याय योजना की तरह 20% गरीब लोगों को सीधे पैसा दीजिए। क्योंकि गरीबों को दिक्कत हो रही है और होने वाली है। न्याय योजना की जगह कोई और नाम रख लीजिए बेरोजगारी शुरू हो गई है और इसका बहुत बुरा रूप आने वाला है। रोजगार देने वाले SMEs के लिए पैकेज तैयार कीजिए। बड़ी कंपनियों के लिए पैकेज तैयार कीजिए जिस प्रकार से, जिस गति से पैसा राज्यों को पहुंचना चाहिए, वो नहीं हो रहा। कोरोना से दो मोर्चों पर जंग चल रही है- मेडिकल और आर्थिक खाने की कमी आएगी। गोदाम में स्टोरेज है। तो गरीबों को भोजन दीजिए। जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, उनको भी इसमें शामिल कीजिए। खाद्य सुरक्षा का एक रास्ता तैयार कीजिए ।

मुझे दुःख है कि गोदाम में रखा हुआ अनाज लोगों तक नहीं पहुंचा; SMEs को मालूम हो जाना चाहिए था कि उनके लिए क्या किया जा रहा है? टेस्टिंग के मामले में अब तक जो हुआ, वो हो गया। उसको भूल जाइए। लेकिन, अब हम इमरजेंसी स्थिति में हैं। इसलिए अब हम मिलकर, पूरा हिंदुस्तान मिलकर इससे लड़े। कमजोर तरीके न अपनाकर, रणनीति के साथ काम करना होगा एक चीज को समझना होगा कि लॉकडाउन से हमारा काम नहीं बना है, बल्कि स्थिति पोस्टपोंड हुई है। इसलिए राज्यों को GST दीजिए; राज्यों से बात कीजिए। इसी दिशा की अभी जरूरत है अगर आप कुछ प्रमुख क्षेत्रों को खोलते हैं, तो बीमारी की पहचान के लिए टेस्ट का उपयोग करें। यह वह जगह है, जहां गतिशील रूप से हॉटस्पॉट्स की पहचान करने के लिए टेस्टिंग का बढ़ना महत्वपूर्ण है भारत में दो बुनियादी क्षेत्र बने – हॉटस्पॉट ज़ोन और नॉन-हॉटस्पॉट। वायरस की पहचान के लिए टेस्ट का उपयोग कीजिए, ताकि आप हॉटस्पॉट की तुरंत निगरानी कर सकें और उसे नियंत्रित कर सकें ।

• जब आप लोगों को बंद कर देते हैं, तो बीमारी बंद हो जाती है, जब आप दरवाजा खोलते हैं, तो बीमारी तेजी से बाहर आती है बड़े पैमाने पर वित्तीय समस्या आने वाली है। आप बेरोजगारी की पहली लहरों को देखने जा रहे हैं और फिर यह बढ़ेगी। आप हमारी वित्तीय प्रणाली पर भारी दबाव देखेंगे आपको स्ट्रक्चर सेट करना होगा और अपनी फंडिंग का प्रबंधन करना होगा। यदि आप अपना सारा पैसा अभी खर्च करते हैं और तब वित्तीय संकट होगा, इसलिए आपको रणनीतिक रूप से सोचने और आगे बढ़ने की आवश्यकता है हमारे लिए, जीवन सबसे महत्वपूर्ण है और हम बस अपने लोगों को इन परिस्थितियों में नहीं आने दे सकते। हमें उनकी रक्षा करनी होगी और हमारी अर्थव्यवस्था को भी नष्ट नहीं करना होगा बहुत कमजोर तरीके देखकर मुझे चिंता होती है। मुझे राज्यों को बहुत अधिक शक्ति देना; लॉकडाउन रणनीति के बारे में राज्यों और पीएम के बीच सामंजस्य देखना अच्छा लगेगा  कोविड को नियंत्रित नहीं किया जा सकता है, इसे गतिशील रूप से प्रबंधित करना होगा। यदि आप इसे ठीक से प्रबंधित करते हैं, तो आप इससे लड़ने में सक्षम होंगे, लेकिन यदि आप इसे आज़माते हैं और इसे नियंत्रित करते हैं, तो आप नहीं कर पाएंगे बातचीत से परे राज्यों को पैसा दिए जाने की जरूरत है, मुख्यमंत्रियों से पूछिए कि उन्हें क्या चाहिए, केंद्रीय सरकार कैसे मदद कर सकती है। यह वार्तालाप से अधिक है, यह काम करने का एक तरीका है।

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